Love Story…

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​​He : Hello 😍😍

She : Thand kese lag gai Itna.. 😕

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He : Pata nhi 😣 pehele Hello to bol Le motu😅

She : Pata nhi kya…😕

thand tumha lagi he mujhe nhi 😏

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He : Thand to tujhe bhi lagi he 😕

She : Nhi lagi mujhe 😟

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He : Tu kya sochti he Tu hi Akeli mujhe Itna janti he me nhi janta 😅

She : To pyar to me hi Jyada krti hun na 😏

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He : Ese Matt bol me bhi krta hun

She : Kuch bhi bolo me hi Jyada krti hun 😌

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He : Chal Tu jeeti me hara … Wese bhi Tu behes me expert he 😘😘

She : Me expert nhi hun bs ap jan buch ke har jate Ho mujhe jeetane keliye 😍😍

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He : Ab tujhse harne me mujhe acha lagta he pagal 😘😘

She : Hum Kis baat se Kis baat per Aageye…. 😳😒

Ab Batao thand kese lagi…?

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He : Sach me nhi Pata 😞

She : Thand Kitna he wanha😫

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He : Bas Teri Kami he 😍

She : Kuch bhi 😟

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He : Sach me bs Itna thand he ki Teri Kami he 😍😂

She : Medicine liya…? 😟 Nhi liya hoga Mujhe ache se Pata he… 😏

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He : Ab thand me kya medicine lun…thik hojayega Apne ap ☺

She : Thand koi mehmaan nhi he Jo aayega… Baithke chai piyega or Jaate waqt bolega Apko Jyada Taklip to nhi Diya na mene 😕😕

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He : Hahahaha 😉 Tere Ye Baate sunke hi mera thand Gyab hojata he 😆

She : Jyada drame Matt kijiye…. Chup chap jaake medicine Le lijiye 😕

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He : Pagal I love you 😘😘😘

Tu medicine Le pehele khud… Dono saath me thik hojayenge 😍😘😍

She : I love you too pagal😍😘😍 Ap bhi Le Lena medicine ☺☺

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प्यार का सबक😊

प्यार का सबक😊

  प्यार का सबक 😊 एक बार की बात है. एक राह चलते फकीर से एक लड़के ने पूछा– “बाबा! …

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ईमानदारी का फल – Hindi Story Teaching Honesty

ईमानदारी का फल - Hindi Story Teaching Honesty
 

 🚔ईमानदारी का फल 

Hindi Story Teaching Honesty

ईमानदारी_का_फल   Hindi Story Teaching Honesty
ईमानदारी_का_फल   Hindi Story Teaching Honesty

 

बहुत समय पहले की बात है, प्रतापगढ़ के राजा को कोई संतान नहीं थी. राजा ने फैसला किया कि वह अपने राज्य के किसी बच्चे को ही अपना उत्तराधिकारी चुनेगा. इसी इरादे से एक दिन सभी बच्चों को बुलाया गया. राजा ने घोषणा की कि वह वह वहां मौजूद बच्चों में से ही किसी को अपना उत्तराधिकारी चुनेगा.

उसके बाद उसने सभी बच्चों के बीच एक छोटी सी थैली बंटवा दी…. और बोला,

“प्यारे बच्चों, आप सभी को जो थैली दी गयी है उसमे अलग-अलग पौधों के बीज हैं. हर बच्चे को सिर्फ एक ही बीज दिया गया है…आपको इसे अपने घर ले जाकर एक गमले में लगाना है. 6 महीने बाद हम फिर यहाँ इकठ्ठा होंगे और उस समय मैं फैसला करूँगा कि मेरे बाद प्रतापगढ़ का अगला शाषक कौन होगा?

 

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उन्ही लड़कों में ध्रुव नाम का भी एक लड़का था. बाकी बच्चों की तरह वह भी बीज लेकर ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर वापस पहुँच गया.

 

माँ की मदद से उसने एक गमला चुना और उसमे और अच्छे से उसकी देखभाल करता.

दिन बीतने लगे, पर हफ्ते-दो हफ्ते बाद भी ध्रुव के गमले में पौधे का कोई नामोनिशान नहीं था.

वहीँ अब आस-पास के कुछ बच्चों के गमलों में उपज दिखने लगी थी.

ध्रुव ने सोचा कि हो सकता है उसका बीज कुछ अलग हो… और कुछ दिनों बाद उसमे से कुछ निकले.

और ऐसा सोच कर वह पूरी लगन से गमले की देखभाल करता रहा. पर तीन महीने बीत जाने पर भी उसका गमला खाली था.

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50 रुपये का नोट… – 50 rupee note

50 रुपये का नोट... - 50 rupee note

50 रुपये का नोट… – 50 rupee note

50 रुपये का नोट... - 50 rupee note

 
50 रुपये का नोट – 50 rupee note – एक बिजली के खम्बे पर एक पर्ची लगी हुई थी.. जिस पर कुछ  लिखा हुआ था … मै पढ़ ने के लिए रुक गया..उस मे लिखा था..
       
।।।।।।।  कृपया कर के जरूर पढ़ें ।।।।
 
इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट गिर गया..मेरी नजर कमजोर होने के कारण वो मुझे मिला नही ..जिस किसी को भी मिले ..नीचे लिखे पते पर पहुँचा देवे .. 
 
नीचे पता लिखा हुआ था.. पर्ची पढ़ कर मैंने सोचा कि एक 50 रुपये का नोट किसी के लिए इतना जरूरी है …तो क्यों न उसकी मदद की जाए…
 
लिखे हुए पते पर पहुँचा तो देखा…एक बुजुर्ग औरत अकेले रह रही थी। मैने कहा ..माता जी ये लो आप का 50 रुपये का नोट..मुझे मिला गया रास्ते पर…आप ने खम्बे पर पर्ची लिख कर लगवाई थी..वही पढ़ कर यहा पहुँचा हूँ..
 
यह सुन कर बुजुर्ग औरत रोने लगी और कहने लगी…. बेटा अभी तक 70 -75 भले आदमी मुझे 50 रुपये का नोट दे चुके है.. अब मै अनपढ़ अकेली औरत हूँ.. और नजर भी कमजोर है.. पता नही कौन मेरी इस हालत को देख कर वहाँ खम्बे पे पर्ची लगा गया..
 
मेरे बहुत जिद्द करने पर …उस बुजुर्ग औरत ने रोते हुए वो 50 रुपये का नोट पकड़ा …और बोली ।
 
बेटा जाते  हुए वो पर्ची फाड़ कर फेंक देना … जहा लगी है..
मैंने हाँ तो कर दी ..पर पर्ची फाड़ने को मेरा जमीर नही माना..
मैंने सोचा मुझ से पहले जितने भी लोग 50 रुपये देने गये होंगे .. हो सकता है माता ने सब को पर्ची फाड़ने का कहा होगा … जब उन्होंने पर्ची नही उतार कर फेंकी तो मै क्यों पर्ची उतार कर फेकू..
 
फिर मैने उस आदमी के बारे में सोचा …जिस ने ये पर्ची लगाई होगी..कितनी अच्छी सोच से उस ने गरीब बुजुर्ग औरत की मदद करने की ठानी ….
 
किसी की भी मदद करने के रास्ते बहुत है …बस नियत होनी चाहिए..🙏🙏🙏
 

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बोले हुए शब्द वापस नहीं आते …【Spoken words do not return…】

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते ...【Spoken words do not return...】
बोले हुए शब्द वापस नहीं आते…
【Spoken words do not return…】
 
एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा।
 
संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया।
 
तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”
 
किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे। और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा। तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते।
 
इस कहानी से क्या सीख मिलती है :-
 
कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है।
 
आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए।
 
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बोले हुए शब्द वापस नहीं आते ...【Spoken words do not return...】
 
Once a farmer called his neighbor very bad, but when he later realized his mistake he went to a saint. He asked the saint how to take back his words.
 
 
 The saint told the farmer, “You collect a lot of feathers, and keep them in the middle of the city.”  The farmer did the same and then reached the saint.
 
 
 Then the saint said, “Now go and collect those wings and bring them back”
 
 
 The farmer went back, but by then all the wings had flown in from the air.  And the farmer reached the saint empty-handed.  Then the saint told him that the same thing happens with the words you say, you can easily remove them from your mouth but you cannot take them back even if you want to.
 
 
 What can be learned from this story: –
 
 
 Before saying something bitter, remember that after saying good and bad, your words cannot be taken back by doing anything.  Yes, you can go and ask for forgiveness from that person, and should also ask for it, but human nature is something that a human being gets hurt somewhere.
 
 
 If you call someone bad, then he hurts you more to make him suffer.  What is the benefit of suffering yourself, it is better to be silent.
 
@Thanks 💚
 
 

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जीवन संघर्ष Motivational Story In Hindi For Life Struggle

 
जीवन संघर्ष Motivational Story In Hindi For Life Struggle
 

जीवन संघर्ष Motivational Story In Hindi For Life Struggle

जीवन संघर्ष – Life Struggle Motivational Story..जब तक जीवन है तब तक संघर्ष है. लाइफ हमेशा आसानी से नहीं गुजरती. हर दिन कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष लाइफ में आता है और आता रहेगा.
ऐसा कोई नहीं हैं जिसकी लाइफ में चुनोतियाँ न हों, दुःख न हों, कठिनाई न हों, रुकावटें न हों, कोई अपनी नौकरी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, कोई अपने रिश्ते बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है और कोई नौकरी ढूंढने के लिए.
संघर्ष का दौर तो तब से शुरू हो जाता जब एक बच्चा माँ के पेट में होता है. जब वो चलना, बोलना सीखता है उसके लिए भी संघर्ष करता है. गिरता है, उठता है फिर गिरता है. जब बड़ा होता है पढाई के लिए संघर्ष, उसके बाद नौकरी के लिए संघर्ष ‘जब तक लाइफ है हमें संघर्ष करते हुए जीना होता है.
आज में आपसे एक छोटी सी कहानी (Short Motivational Story about Struggle) शेयर करने जा रहा हूँ. जो आपके सोचने के तरीके को यकीनन बदल देगी. आईये जानते हैं –

जीवन संघर्ष Motivational Story In Hindi For Life Struggle

एक बेटी ने अपने पिता से कहा में बहुत परेशान हो चुकी हूँ. मेरी लाइफ परेशानियों, बाधाओं, कठिनाइयों से भरी हुई है. एक प्रॉब्लम जाती है तो दूसरी प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है. मैं बहुत दुखी हो चुकी हूँ. मैं क्या करूँ.।


अपनी बेटी के इस तरह से बात करने पर पिता सोच में पड़ गया. थोड़ा सोचने के बात पिता ने अपनी बेटी से कहा “मेरी बेटी क्या तुम मेरे साथ रसोई (Kitchen) में चल सकती हो.” बेटी थोड़ा मायूस हो गई, वो सोचने लगी मैंने अपने पिता को अपनी प्रॉब्लम बताई और वो किचन में ले जा रहे हैं. पर रूखे मन से अपने पिता से बोली “ठीक है पापा में चलती हूँ”।

उसके पिता ने तीन पतीले लिए और उनमे बराबर बराबर पानी भर दिया और गैस के तीन चूल्हों पर रख दिया, एक पतीले में उन्होंने कुछ आलू डाले, दूसरे पतीले में कुछ अण्डे डेल और तीसरे पतीले में उन्होंने कॉफी बीन्स डाली।  और तीनो पतीलों को एक सामान ताप में उबले के लिए रख दिया और इंतज़ार करने लगे.।

इस बीच वह अपनी बेटी से कुछ भी नहीं बोले, बस उन पतीलों को देखते रहे. बेटी भी चुपचाप खड़ी रही और कभी अपने पिता को तो कभी उन पतीलों को देखती रही. करीब 15 मिनट के बाद जब वो चीज़े काफी उबल गई उन्होंने तीनों चुल्हे बंद कर दिए.।

आलू वाले पतीले से आलू बाहर निकाले, अण्डें वाले पतीले से अण्डों को निकला और काफी को एक प्याले में निकला, और बेटी से बोले “बताओ तुमने क्या देखा”.।

बेटी ने जबाव दिया “आलू, अण्डे और कॉफी”. पिता ने कहा “आलू को देखकर बताओ पहले और अब में क्या अंतर है”. बेटी बोली “आलू पहले सख्त थे, अब उबलने से मुलायम हो गए हैं”. अब पिता ने अण्डों से छिलके निकालने को कहा, बेटी ने ऐसा ही किया। पिता ने पूछा “अब पहले में अण्डों और अब के अण्डों में क्या अंतर है”.   बेटी बोली “पहले अण्डें ऊपर से सख्त थे, और अंदर तरल था अब अण्डे अपने छिलकों से बहार हैं और तरल से सख्त हो चुके हैं”. पिता ने कहा “अब कॉफी के बारे में बताओ” बेटी बोली ” कॉफी बीन्स अलग अलग थी, आप पानी के साथ मिल चुकी हैं और अच्छी खुशबू भी आ रही है”.।

अब पिता ने बताया की इन तीनों चीज़ों को एक सामान पानी में, एक ही ताप पर और एक सामान टाइम पर उबाला, उसके बाद परिणाम भी अलग अलग मिले। हमारी लाइफ भी ऐसी ही है।  हर किसी की लाइफ में प्रॉब्लम आती है, और सभी को संघर्ष करना पड़ता है पर यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम इसको किस तरह से देखते हैं.।

जब संघर्ष का समय आता है तब किसी के लिए एक समस्या एक बड़ी समस्या होती है वहीं किसी दूसरे के लिए वही समस्या एक अवसर बन जाती है।  ये सब आपकी सोच पर निर्भर करता है. इसीलिए कभी भी समस्या से घबरायें नहीं, पॉजिटिव रहें। इस बात को याद रखें ” अगर यह काम हो गया तो अच्छा है और नहीं हो पाया तो और भी अच्छा है”. “संघर्ष केवल उन लोगों के हिस्से में आतें हैं. तो इसे बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताक़त रखते हैं और सफल होते है”.।

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