History of Meena caste in Rajasthan in Hindi

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History of Meena caste in Rajasthan in Hindi: जब भी राजस्थान की जातियों की बात आती है तो इसमें से मीणा जाति का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता है। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में मीणा जाति की उत्पत्ति केसे हुई है और मीणा जाति का इतिहास क्या है।

यदि आपको इन सभी विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तथा आप इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको “मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास” (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने वाले हैं कि राजस्थान में मीणा जाति का इतिहास ((History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)) क्या है, इसके अलावा हम आपको मीणा जाति विषय से जुड़ी हर एक जानकारी इस पोस्ट में देने वाले हैं। तो ऐसे में आज का यह पोस्ट आपके लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है, तो इसको अंत तक जरूर पढ़िए।

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राजस्थान की मीणा जाति से जुड़ी कुछ खास बातें

  • मीणा जाति भारत की एक जाति है जो मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पाकिस्तान में रहती है।
  • यह एक संस्कृति और भाषा के साथ एक मतवादी समुदाय है।
  • मीणा जाति के लोग मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़े हुए हैं।
  • मीणा जाति का शौक गायिकी, नृत्य और धार्मिक कार्यों में होता है।
  • मीणा जाति की एक विशेषता यह है कि इनके पास अपनी खुद की भाषा होती है, जो मीणाक्षी या मीणानी नाम से जानी जाती है।
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मीणा जाति की उत्पत्ति

"मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास" (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)

मीणा जाति भारत की प्राचीनतम जातियों में से एक प्रमुख जाति है। मीणा जाति की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कई मत और कुछ किंवदंतियां (असंबद्ध इतिहास की घटनाओं के आधार पर लोकजीवन में प्रचलित कथाओं के आधार पर) प्रचलित है।

सच तो यह है कि किसी भी जाति का जन्म बरसों की सामाजिक प्रक्रियाओं का परिणाम होता है, जिसका सही और सटीक विवरण मिलना बहुत मुश्किल होता है और जब बात मीणा जैसी प्राचीनतम जाति की हो तो यह और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। जब लोग जातियों की उत्पत्ति को जानने और खोजने का प्रयत्न करते है तो ऐसी स्थिति में कई मिथक अस्तित्व में आ जाते है।

सबसे ज्यादा प्रचलित कल्पित कथाओ के अनुसार मीणा जाति की उत्पत्ति भगवान विष्णु के ‘मत्स्यावतार’ से मानी जाती है। इसी कारण से मीणा ‘मत्स्य’ और कालांतर में ‘मीणा’/ ‘मीना’ कहलाये। अगर हम इतिहास और भौगोलिक तथ्यों का विश्लेषण करे तो मीणा जाति के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारीयाँ प्राप्त होती है।

  • मीणा जाति भारत के उत्तर पश्चिम में रहने वाली एक जाति है।
  • मीणा जाति राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में पाई जाती है।
  • मीणा जाति की भाषा मीणा भाषा है, जो भारतीय भाषाओं के मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में बोली जाती है।
  • मीणा जाति विभिन्न धर्मों के होते हुए अपनी विशेष परंपराओं और आदतों का पालन करती है।
  • मीणा जाति का प्रमुख व्यवसाय कृषि और चारखानी होता है। इसके अलावा, कुछ लोग फूलों, मकान बनाने के लिए लकड़ी और घास के जंगलों के विकास व व्यवसाय में भी लगे रहते हैं।
  • मीणा जाति के लोग अपनी परंपरागत वस्तुओं को बहुत मानते हैं और उन्हें अपने घरों में सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करते हैं।
  • इसके अलावा, मीणा जाति अपने समुदाय में उत्सव और मेलों का आयोजन करते हैं जो उनकी संस्कृति और परंपराओं को संजोने में मदद करते हैं।

मीणा शब्द की उत्पत्ति को लेकर यह माना जाता है की मीणा शब्द की उत्पत्ति मीन शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है मत्स्य/मछली। ‘मीन’ शब्द मूलत: तमिल शब्द माना जाता है, जो बाद में संस्कृत भाषा में सम्मिलित कर लिया गया।

मीणा एक क्षत्रिय जाति है, जिसने इतिहास में सोलहवीं शताब्दी तक शासन किया है। कभी ढूंढार और हाड़ौती समेत पूरे पूर्वी राजस्थान में मीणाओं का राज था और अजमेर मेरवाड़ा में इनका काफी वर्चस्व था।

मीणा जाति सदियों से पूर्वी राजस्थान के जयपुर, अलवर, भरतपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में निवास करते आये है जिसे प्राचीन भारत के काल से ही मत्स्य प्रदेश या मत्स्य जनपद के नाम से जाना जाता रहा है।

प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रन्थों में विभिन्न महाजनपदों / प्रदेशों का उल्लेख आता है, इनमें से एक मत्स्य जनपद / मत्स्य प्रदेश भी है। इस जनपद का उल्लेख महाभारत और कई बौद्ध ग्रंथों में भी मिलता है जिसके अनुसार यहाँ के निवासी मत्स्य कहलाते थे और मीणा जाति का गण चिन्ह मत्स्य/ मीन था।

महाभारत मे मत्स्यों की राजधानी विराटनगर को बताया गया है जिसे अब बैराठ के नाम से जाना जाता है और यह अब जयपुर के पास में स्थित है।

मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास

"मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास" (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)

मीणा जाति भारत के उत्तर पश्चिमी भागों में रहने वाली एक आदिवासी जाति है। वे राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार में बसते हैं।

मीणा जाति के इतिहास के बारे में कुछ लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अनुमान लगाया जाता है कि वे बहुत पुरानी जाति हो सकती हैं। वे आदिवासी होने के कारण वे अपने समाज और संस्कृति को संभालते आए हैं।

  • मीणा जाति का इतिहास भारतीय महासागर के उत्तरी तटों से जुड़ा हुआ है। इनके इतिहास में राजस्थान का भी एक बड़ा योगदान है।
  • राजस्थान के कुछ हिस्सों में मीणा जाति को राजाओं के द्वारा दंड दिया जाता था, जिसके कारण उन्हें कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था।
  • आधुनिक भारत में, मीणा जाति के सदस्य अपनी संस्कृति, परंपराएं और धार्मिक आदर्शों को जीवित रखने के लिए लड़ रहे हैं। वे अधिकतर खेती करते हैं।

वैसे तो मीणा जाति राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र में सदियों से रहते आये है। लेकिन आज भी मीणाओं की बहुत बड़ी आबादी जयपुर, अलवर, भरतपुर और इसके आसपास के जिलों में ही निवास करती है।

मीणाओं के बहीभाट (जागा – जातियों की वंशावली लेखन का कार्य) के अनुसार मीणाओं में 12 पाल, 32 तड़ और 5248 गौत्र है। जागा सदियों से मीणाओं के इतिहास, उनकी वंशावली का लेखा-जोखा रखते आये है। साथ ही ऐतिहासिक महत्व के कई समाज की महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का ब्यौरा भी उनकी पोथियों से मिलता है।

अफसोस की बात है कि वर्नतमान में नई पीढ़ी की उदासीनता के चलते जागा अपना पुश्तैनी काम छोड़ रहे है जिसकी वजह से हमारा इतिहास भी नष्ट हो रहा है। हम सबको इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

कालांतर में मीणाओं में कई वर्ग बनते चले गये, जो निम्न प्रकार से है :-

  1. #1 जमींदार मीणा,
  2. #2 चौकीदार मीणा,
  3. #3 रावत / मेर मीणा,
  4. #4 प्रतिहार मीणा / पड़िहार मीणा,
  5. #5 भील मीणा
  6. #6 मेव मीणा

इसके अतिरिक्त भी कुछ और छोटे छोटे वर्ग है।

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मीणा जाति का प्रमुख त्यौहार

मीणा जाति के पास कई प्रमुख त्यौहार होते हैं, जो उनकी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक हैं। कुछ प्रमुख त्यौहार हैं:

  1. तीज – यह त्योहार मीणा जाति का सबसे बड़ा त्योहार होता है जो सावन के महीने में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति के लंगर से खाना खाती हैं और पर्वतों पर जाकर पूजा भी करती हैं।
  2. माखन संग्रह एवं मीणा सम्मेलन – ये त्योहार मीणा जाति के अन्य बड़े त्योहार होते हैं जो दिसंबर महीने में मनाये जाते हैं। माखन संग्रह त्योहार में लोग दूध और माखन का संग्रह करते हैं, जो उन्हें खरीदने आते हैं। मीणा सम्मेलन त्योहार में जमीन पर अलग-अलग खेल और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
  3. रण्णी जातरा – यह त्योहार मीणा जाति के द्वारा हरियाणा और राजस्थान में मनाया जाता है। इस त्योहार में लोग भगवान राम की यात्रा का आयोजन करते हैं।

इन त्योहारों के अलावा भी मीणा जाति के कुछ और त्योहार होते है। इन त्यौहारों के अलावा भी मीणा जाति के कुछ अन्य त्यौहार होते हैं जो उनकी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक होते हैं।

मीणा जाति के प्रमुख मेले

मीणा जाति के प्रमुख मेले निम्नलिखित हैं:

  1. माखन संग्रह मेला – यह मेला दिसंबर में मनाया जाता है। इस मेले में मीणा जाति के लोग माखन खरीदने आते हैं।
  2. रामदेव जी मेला – यह मेला फरवरी-मार्च के बीच में मनाया जाता है और इसे संत रामदेव जी के जन्मदिन पर मनाया जाता है।
  3. सती जागरण मेला – यह मेला मई महीने में मनाया जाता है और इस मेले में संतों का आगमन होता है।
  4. रण्णी जातरा – यह जातरा भी मीणा जाति के प्रमुख मेलों में से एक है जो हरियाणा और राजस्थान में मनाया जाता है।

इन मेलों के अलावा भी अन्य मेले होते हैं जो मीणा जाति के विभिन्न गांवों में मनाए जाते हैं।

मीणा जाति में शादी

"मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास" (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)

मीणा जाति में शादी अपनी परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार मनाई जाती है। शादी की तैयारी में कई दिन लग सकते हैं और शादी के विभिन्न अवसरों पर विभिन्न रस्मों का पालन किया जाता है।

मीणा जाति में दादी भट्ट नामक ब्राह्मण को शादी का मुहूर्त तय करने का काम सौंपा जाता है। शादी से पहले, दुल्हे और दुल्हन के घर की सफाई करने के लिए लोग अलग-अलग काम करते हैं।

शादी के दिन, दुल्हे के घर से शुभ मुहूर्त के समय दुल्हन के घर की तरफ जाने के लिए निकासी की जाती है। शादी के बाद, दुल्हे और दुल्हन के परिवार अपने गांव वापस चले जाते हैं जहां दोनों के घर अलग होते हैं।

मीणा जाति में शादी में धूम-धाम से नहीं, बल्कि सद्भाव, एकता और समझौते से मनाई जाती है।

मीणा जाति के गोत्रो के नाम

मीणा जाति में कई गोत्र होते हैं। कुछ मुख्य गोत्रों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. बड़ा गोत्र
  2. चौहान गोत्र
  3. भोर गोत्र
  4. रावत गोत्र
  5. मीणा गोत्र
  6. धाकड़ गोत्र
  7. राठौड़ गोत्र
  8. सोमवंशी गोत्र
  9. जागड़ गोत्र
  10. बघेल गोत्र

ये गोत्र मीणा जाति में पाए जाते हैं और अन्य उपजातियों में इनका विभाजन भी किया जाता है।

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मीणा जाति की कुलदेवियाँ और गोत्र

"मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास" (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)

यहाँ मीणा समाज/जाति से जुड़े गोत्रों और कुलदेवियों की जानकारी दी जा रही है। जिस गोत्र व कुलदेवी का नाम इस लिस्ट में उपलब्ध नहीं है, आप उसकी जानकारी हमे कॉमेट बॉक्स में दे सकते हैं। जिससे आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी का हमारी टीम द्विवारा श्लेषण कर उसे आपके नाम के साथ इस पोस्ट में अपडेट कर दिया जायेगा।

मीणा समाज के गोत्र एवं कुलदेवियां (Kuldevi and Gotra List of Meena Samaj)

सं.मीणा समाज के गोत्र का नामकुलदेवी का नाम
1.चांदा (Chanda)बाण माता , बुडवाय / गुडवाय
2.टाटू (Tatu)बड़वासन माता 
3.जगरवाल (Jagarwal)अहराई माता
4.महेर (Maher)घटवासन माता, घाटारानी
5.बैपलावत (Beplawat)पाली माता
6.मानतवाल / माणजवाल  (Manatwal / Manajwal), महर (Mahar)जीण माता 
7.बारवाल / बारवाड़  (Barwal / Barwad)चौथ माता
8.मरमट (Marmat)दुगाय माता / दुर्गा माता / ज्वालामाता
9.जोरवाल (Jorwal/Jarwal)ब्रह्माणी माता
10.बेडवाल (Bedwal) / व्यानडवाल (Vyanadwal)बांकी माता
11.नायी मीणा, ककरोडा कुकल्डा (Nayi Meena, Kakroda Kukalda)नारायणी माता
12.सुसावत (Susawat)अम्बा माता- आम्बेर
13.बैनाडा (Benada), गोहली / गोल्ली (Gohli)आशाजाई माता : चामुण्डा माता
14.खोडा  (Khoda)सेवाद माता
15.उषारा (Ushara)बीजासण माता 
16.चन्नावत (Chanawat ), गगरवाल (Gagarwal)कैला माता
17.जेफ (Jef)वधासन माता
18.सहेर, सहरिया (Saher, Sahariya)गुमानी माता
19.डाडरवाल (Dadarwal), मांदड  (Mandad)खुरी / खुर्रा माता
20.डोबवाल (Dobwal) /डींभवाल (Dinbhwal)खलकाई माता
21.कटारा (Katara)धराल माता
22.चरणावत (Charnawat), पारगी (Pargi),नटरावत (Natrawat), टोरा मंदलावत (Tora Mandlawat)काली माता
23.हरमोर (Harmor )जावर माता
24.घुणावत  (Ghunawat)लहकोह माता / लहकोड माता
25.मेवाल (Mewal)मैणसी /असावरी / बाण / आवरी माता
26.कोटवाल्या / कोटवाल (Kotwalia / Kotwal)मोरा माता
27.सिहरा (Sihra)दांत माता, सप्तमातृका
28.मांडल / मंडिया  (Mandal / Mandiya)जोगनिया माता
29.जारेडा, जन्हाडा  (Jareda, Janhada)बीरताई माता
30.छाँडवाल (Chhandwal)पपलाज माता
31.काकस (Kakas), गोहली  (Gohli)चामुंडा माता
32.कंजोलिया (Kanjolia), करेलवाल (Karelwal)ईंट माता
33.आदि मीणा (Adi Meena)गोंदला माता
34.मोटिस  (Motis)टाड माता
35.ध्यावणा  (Dhyavana)ध्यावण माता
36. गोठवाल (Gothwal), बरवाल (Barwal)बनजारी माता
37.नैमिणा (Naimina)पंच माता, दूधाखेड़ी पंच माता
38.जहेला (Jahela), इलीचा (Ilicha)मनसा माता
39.गोमलाडू (Gomladu)सन्त्या माता
40.मेगल (Megal)सावली माता
41.आदिवासी मीणा (Aadivasi Meena)सीतामाता
42.चाँद गोत्र  (Chand Gotra)चाँदामाता
43.बिराई माता
44.मीणा संभाग का तीर्थघुमण्डा
45.चांदली
46.पल्ली माता
47.श्यावड माता
48.शीतला माता
49.खमना माता
((History of Meena caste in Rajasthan in Hindi))

नोट: जानकारी के अनुसार कुछ कुलदेवियाँ एक से अधिक गोत्रों में अथवा एक ही गोत्र में एक से अधिक कुलदेवीयों की मान्यता होती है, इसलिए अपने कुल के रीति-रिवाज व मान्यता के अनुसार ही देवी की आराधना करनी चाहिए।

मीणा जाति का वंश

मीणा जाति भारत के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में पाई जाती है। मीणा जाति का इतिहास बहुत पुराना है और वे आदिवासी जनजाति के रूप में जाने जाते हैं।

मीणा जाति का वंश विभिन्न राजाओं और साम्राज्यों के साथ जुड़ा हुआ है। वे इतिहास में मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह के साथ लड़ाई करने में भी शामिल थे।

मीणा जाति के वंश में गोत्रों का विस्तार होता है। गोत्रों के अनुसार मीणा जाति का वंश निम्नलिखित है:

  • अटवाल,
  • बड़वाल,
  • बुंदेल,
  • बुजवाल,
  • चौहान,
  • जाट,
  • कांटिया,
  • खिचरौलिया,
  • कुम्हार,
  • लोदवाल,
  • माँड़,
  • मोतवाल,
  • मुरावाल,
  • नंदवाल,
  • राठौर,
  • संधू और
  • सोमवांशी आदि।

इन गोत्रों के अलावा भी कुछ और गोत्र हो सकते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

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मीणा जाति पर कहानीयाँ

मीणा जाति के बारे में कई कहानियां हैं। यह एक आदिवासी जनजाति है, जो उत्तर भारत में रहती है। यह जाति अपने संस्कृति, भाषा, संगीत और नृत्य के लिए जानी जाती है।

एक कहानी के अनुसार, मीणा जाति अपनी बहादुरी के लिए जानी जाती है। इस कहानी में एक मीणा नायक ने एक शेर को मार डाला था। उसके बाद से, शेर का खाता मीणा जाति के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण हो गया था।

एक और कहानी में, मीणा जाति के एक साहसी युवक ने एक दरिंदे से लड़ाई की थी। दरिंदा उसे परेशान कर रहा था, लेकिन उसने इसे जीत लिया। इस कहानी से पता चलता है कि मीणा जाति बहुत बहादुर होती है।

एक और प्रसिद्ध कहानी में, मीणा जाति के राजाओं ने भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह ने मीणा जाति के साथ मिलकर मुगल सम्राट अकबर के खिलाफ लड़ाई की थी। इस लड़ाई में, मीणा जाति के वीर बहुत बड़ा योगदान देने में सफल रहे.

मीणा जाति पर शायरी

हमारे पास मीणा जाति पर शायरी की कुछ मशहूर लाइन्स हैं:

दुनिया की सबसे ताकतवर ताकत बड़ी से बड़ी ताकत से नहीं, बल्कि एक छोटे से समूह से भी होती है। – मीणा जाति

जब तक मनुष्य अपने मूलों का सम्मान नहीं करता, तब तक उसे सम्पूर्णता नहीं मिल सकती। – मीणा जाति

हम उन लोगों से नहीं मिलते जो हमारी तरह होते हैं, हम उन लोगों से मिलते हैं जो हमारे समूह से भिन्न होते हैं। – मीणा जाति

जब तक हम मीणा जाति का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक हम हमेशा अधोरे रहेंगे। – मीणा जाति

हम मीणा जाति हमेशा बेकाबू होते हैं, लेकिन हमें आज भी अपनी मूल संस्कृति, भाषा और ट्रेडिशन्स का गर्व है। – मीणा जाति

मीणा जाति की पोशाक

मीणा जाति की पोशाक उनकी स्थानीय विभिन्नताओं और परंपराओं पर निर्भर करती है। इसलिए, मीणा जाति की पोशाक विभिन्न रूपों में उपलब्ध होती है।

लेकिन सामान्य रूप से, पुरुषों की पोशाक में धोती, अंगरक्षक, कमीज और ऊपरी वस्त्र शामिल होते हैं। स्त्रियों की पोशाक में साड़ी, चोली, घाघरा और ऊपरी वस्त्र शामिल होते हैं।

मीणा जाति की पोशाक में विविध रंगों का उपयोग होता है, जैसे कि लाल, पीला, हरा और नीला। पोशाक में नक्काशी और जर्डोजी भी होते हैं।

आधुनिक जमाने में, मीणा जाति के लोग अधिकतर पश्चिमी वस्त्र पहनते हैं, लेकिन वे अपनी परंपराओं के आभास को बनाए रखने के लिए उन्हें संरक्षित रखते हैं।

मीणा जनजाति पर बनी फिल्मो के नाम

मीणा जाति के प्रमुख लोगो के नाम

• किरोड़ी लाल मीणा

• हरीश चंद्र मीणा

• राम नारायण मीणा

• नमो नारायण मीणा

• लक्ष्मी नारायण झरवाल

• उषा देवी मीणा

• हरिराम मीणा

• गोलमा देवी मीणा

• अर्जुन लाल मीणा

• मुरारी लाल मीणा

• परसादी लाल मीणा

• कैप्टन छुट्टन लाल मीणा

• जसकौर मीणा

• निहारिका जोरवाल

• अमित बिमरोट

• अनु मीणा (Agrowawe कंपनी की संस्थापक)

• रामकेश मीणा

• रघुवीर सिंह मीणा

• गुलाबचंद गोठवाल

• धीरज जोरवाल

• गगन खोड़ा

• ललित मीणा

• जितेंद्र कुमार गोठवाल

• नाथा राम मीणा

• बद्री प्रसाद दुखिया

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FAQ:

राजस्थान में मीणा जाति/जनजाति की जनसंख्या कितनी है?

मीणा जनजाति/जाति राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है, अगर राजस्थान में इसकी कुल जनसंख्या की बात की जाए तो राजस्थान में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मीणा जनजाति की संख्या 43.46 लाख है, और यह राजस्थान की जनसंख्या का कुल 47 प्रतिशत होता है, तो ऐसे में हम यह कह सकते हैं, कि यह राजस्थान की सबसे बड़ी जाति है या जनजाति मीणा जनजाति है।

मीणा शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई है?

"मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास" (History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)

इतिहास के अनुसार मीणा शब्द की उत्पत्ति मीन शब्द से हुई है।

मीणा जाति के अगर प्रमुख आराध्य कोन है?

मीणा जनजाति को अलग-अलग कुल 24 विभागों के अंतर्गत विभाजित किया गया है, इसके अलावा मीणा जाति के अगर प्रमुख आराध्य की बात करे, तो इसकी सूची में गौतम ऋषि का नाम सबसे प्रथम स्थान पर आता है।

मीना समाज की ‘कुलदेवी’ कौन हैं?

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मीना समाज की ‘कुलदेवी’ कौन हैं?
सांसद मीना समाज गोत्र- बैफलावत,
कुलदेवी :- पालिमाता पीठ नागल (लालसोत) दौसा।
कुलदेवी : पापलज जाति भी माता लालसोत को मानते हैं.

मीणा जाति के प्रमुख त्यौहार कोनसे हैं?

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मीणा जाति के प्रमुख त्यौहार हैं:
#1. तीज
#2. माखन संग्रह एवं मीणा सम्मेलन
#3. रण्णी जातरा

आज आपने क्या सीखा

आज किस आर्टिकल के माध्यम से आपने जाना की “मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास” ((History of Meena caste in Rajasthan in Hindi)) क्या है, हमने आपको “मीणा जाति का राजस्थान में इतिहास” के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसके अलावा हमने आपको इस पोस्ट के माध्यम से राजस्थान की मीणा जाति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और रोचक जानकारियां भी शेयर की है।

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