Raksha Bandhan 2021-रक्षाबंधन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आपको यहाँ पर मिलेगी

रक्षाबंधन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आपको यहाँ पर मिलेगी –Raksha Bandhan 2021

रक्षाबंधन का त्‍यौहार दो शब्दों के मिलन से बना हुआ है, “रक्षा” और “बंधन” (“protect” and “bond”)। संस्कृत भाषा के अनुसार  इस त्‍यौहार का मतलब होता है की “एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो” (“A bond that protects”)। यहाँ पर “रक्षा” का मतलब रक्षा प्रदान करना होता है और “बंधन” का मतलब होता है एक गांठ, एक डोर जो की रक्षा प्रदान करे।

हिन्‍दू श्रावण माह (जुलाई-अगस्‍त) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्‍यौहार भाई का बहन के प्रति प्रेम  का प्रतीक है। इस दिन सभी बहने अपने-अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है और अपने भाइयो की दीर्घायु व प्रसन्‍नता के लिए प्रार्थना करती हैं ताकि विपत्ति के दौरान वे अपनी बहन की रक्षा कर सकें।

(रक्षा का अर्थ है बचाव, जहां कुछ स्‍थानों पर महिला ख़ुद को असुरक्षित महसूस करती थी, वे पुरूषों को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती थी) राखी बांधने के बदले में भाई, अपनी बहनों की हर प्रकार के अहित से रक्षा करने का वचन (promise) उपहार (gift) के रूप में देते हैं। रक्षाबंधन त्‍यौहार मुख्‍यत: उत्‍तर भारत में मनाया जाता है।

रक्षा व बंधन दोनों ही शब्द मिलकर एक भाई-बहन का प्रतिक होते हैं। यह त्यौहार खुशी प्रदान करने वाला होता है वहीँ यह त्योहार सभी भाइयों को ये याद दिलाता है की उन्हें अपने बहनों की हमेशा रक्षा करनी है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का History हिंदू पुराण कथाओं एवं ग्रंथो में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार महाभारत में पांडवों की पत्‍नी द्रौपदी ने God कृष्‍ण की कलाई से बहते खून (god कृष्‍ण जी ने भूल से खुद को जख्‍मी कर लिया था) को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनो के बीच भाई – बहन का बंधन विकसित हुआ था तथा god कृष्‍ण जी ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था।

Raksha Bandhan 2021 - रक्षाबंधन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी


रक्षा बंधन का पर्व क्यों मनाया जाता है ?

क्या आप भी एसा सोचते है की रक्षा बंधन का पर्व क्यों मनाया जाता है ?, तो आज हम आपको बताते है की रक्षा बंधन का पर्व क्यों मनाया जाता है। दोस्तों रक्षा बंधन के अवसर पर सभी बहने अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है और साथ में वो भगवान (god) से ये मांगती है की उसका भाई हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहे और दीर्घायु व प्रसन्‍नता के लिए प्रार्थना करती हैं वहीँ भाई भी अपनी बहन को राखी बांधने के बदले में कोई तोहफा प्रदान करता है और ये प्रतिज्ञा करता है की कोई भी विपत्ति आये वो अपनी बहन की रक्षा हमेशा करता रहेंगा।

साथ में भाई भी भगवान से अपनी बहन की लम्बी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना करता है। यह त्यौहार कोई भी मना सकता है फिर चाहे वो सगे भाई बहन हो या न हो। परिवार में सभी को राखी का बेसब्री से इंतजार रहता है, जिसमे सबसे ज्यादा बहनों को भाई का। अब आपको यह तो समझ में आ ही गया होगा की रक्षा बंधन क्यूँ मनाया जाता है।

इस पर्व में भाई-बहन के प्यार को एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है। रक्षाबंधन एक अनोखा ही  हिंदू त्यौहार है जिसे विश्व में केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुसरे कई देशों जैसे की नेपाल में भी भाई-बहन के प्यार का प्रतिक मानकर खूब हर्षो और उल्लाश के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार “Raksha Bandhan” को श्रावण माह (जुलाई-अगस्त) के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

2021 में रक्षाबंधन कितनी तारीख को है ?

2021 में रक्षाबंधन 22 अगस्त (रविवार) को है। पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 21 अगस्त शाम 03:45 मिनट से शुरू होगी और 22 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार हर्षो-उल्लाश के साथ धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन कौन से महीने में है ?

हर साल रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें बड़े प्यार से भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। इस साल राखी का पर्व 22 अगस्त, रविवार को है। २०२१ में पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त शाम से शुरू होगी और 22 अगस्त को सुर्योदय पर पूर्णिमा रहेगी।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त कब है ?

22 अगस्त को पूजा का शुभ मुहूर्त 06 बजकर 15 मिनट सुबह से शाम 05 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। बहनें द्वारा अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 22 अगस्त 2021 को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से शाम 04 बजकर 18 मिनट तक है।

पंचांग के अनुसार साल २०२१ में रक्षाबंधन, 21 अगस्त 2021 शनिवार को शाम 6 बजकर 10 मिनट से आरंभ होगा, जो 22 अगस्त 2021 की शाम 05 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। इस वजह से राखी बांधने के लिए 12 घंटे का मुहूर्त रहेगा।

रक्षाबंधन तिथि : रविवार 22 अगस्त 2021
पूर्णिमा तिथि : 21 अगस्त शाम 3 बजकर 45 मिनट से शुरू, 22 अगस्त शाम 5 बजकर 58 मिनट तक।
शुभ मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 50 मिनट से शाम 6 बजकर 03 मिनट तक।
राखी के लिए दोपहर का समय : 1 बजकर 44 मिनट से 04 बजकर 30 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक।

रक्षाबंधन कैसे शुरू हुआ ?

श्री कृष्ण द्वारा शिशुपाल का वध करते समय श्री कृष्ण जी की तर्जनी अंगुली (finger) में चोट आ गई थी, तो द्रौपदी ने श्री कृष्ण के खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर (साड़ी का किनारा फाड़ कर) उनकी उंगली पर बांधा था। उस दिन भी श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी के चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था। तब से ही रक्षाबंधन की शुरूआत मानी जाती है।

राखी का त्यौहार पुरे भारतवर्ष के साथ-साथ ही विश्व में भी काफी हर्ष एवं उल्लाश के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमें ना कोंई धनी ना कोंई गरीब सभी इसे सभी प्रेम से मनाते हैं।

हमारे भारत में राखी का क्या महत्व है?

यह त्यौहार भाई-बहन के रिश्तों की अटूट डोर (कभी नही टूटने वाला धागा) का प्रतीक है। भारतीय रीतिरिवाजो का यह एक ऐसा त्यौहार है, जो केवल भाई-बहन के स्नेह, प्यार और प्रेम के साथ हर सामाजिक संबन्ध को भी मजबूत करता है। यह त्यौहार भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ-साथ सांस्कृ्तिक, सामाजिक महत्व के लिए भी काफी मायने रखता है।

भारत के दुसरे धर्मों में रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है?

चलिए अब हम आपको बताते है की कैसे भारत के दुसरे धर्मों में रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है :-

  • हिंदू धर्म में : यह त्यौहार हिंदू धर्म में काफी हर्ष एवं उल्लाश के साथ मनाया जाता है। वहीँ इसे भारत के उत्तरी और पश्चिमी भागो में मुख्यतः ज्यादा मनाया जाता है। इसके अलावा भी विश्व के दुसरे देशों में भी इसे मनाया जाता है जैसे की नेपाल, पाकिस्तान, मॉरिशस में भी मनाया जाता है।
  • जैन धर्म में : जैन धर्म में उनके जैन पंडित भक्तों को पवित्र धागा प्रदान करते हैं।
  • सिख धर्म में : सिख धर्म में भी इसे भाई और बहन के बीच मनाया जाता है। वहीँ इसे राखाडी या राखरी कहा जाता है।

भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षा बंधन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बंधन (राखी) बांधती है, जिसे राखी कहा जाता हैं।


रक्षा बंधन के बारे में रोचक जानकारी – Interesting information about Raksha Bandhan

  • हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को हिन्दू त्यौहार रक्षा बंधन को मनाया जाता हैं इसमें रक्षा बंधन (रक्षा सूत्र) बाधकर लम्बी उम्र और दीर्घ आयु व सफ़ल जीवन की कामना की जाती हैं। यह रक्षा सूत्र स्त्री (बहन) और गुरू (पंडित) के द्वारा मुख्यतः बाधा जाता हैं।
  • जब राजा बलि ने भगवान् विष्णु की घोर तपस्या करके उन्हें अपने सामने दिन-रात रहने का वरदान ले लिया था तब माँ लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बाधकर अपने पति भगवान् विष्णु जी को अपने साथ लायी थी। वह दिन भी श्रावण मास के पूर्णिमा का ही दिन था।
  • भारत में पेड़ो को भी “रक्षा सूत्र” (राखी) बाधकर उनके लम्बी उम्र की कामना की जाती है और पेड़ो-वर्क्षो को न काटने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाता हैं।
  • प्राचीन काल में भारत में जब कोई छात्र “स्नातक” (Graduate) की पढ़ाई पूरी कर लेता था तो उनके गुरूजी उनको “रक्षा सूत्र” बाधते थे और छात्र की दीर्घ आयु और सफ़ल जीवन की कामना करते थे और आशीर्वाद देते थे।
  • राजपूत लोग जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर कुमकुम का तिलक (टिका) और हाथ में रेशमी धागा (राखी) बाधती थी ताकि उन्हें युद्ध में विजय मिल सके यह वो शुभ मानती थी ।
  • महाभारत में भी कई ऐसी कथाएँ है जिनका सम्बन्ध राखी से हैं। कृष्ण और द्रोपदी के बारे में एक कथा हैं – भगवान् श्री कृष्ण ने जब सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था तभी उनके तर्जनी ऊँगली कट गयी थी और खून निकलने लगा था तब द्रोपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी ऊँगली पर पट्टी बाँध दिया था। यह घटनाक्रम श्रावण मास की पूर्णिमा को हुआ था। भगवान् श्री कृष्ण ने इस उपकार का बदला द्रोपदी चीरहरण के समय द्रोपदी का चीर बढ़ा कर किया था।
  • सिनेमा के जगत के लिए भी राखी लोकप्रिय विषय रहा हैं और इस पर कई Film भी बनाई जा चुकी है। “राखी” नाम से दो बार film बनी, पहली बार 1949 में और दूसरी बार 1962 में बनी। 1972 में “राखी और हथकड़ी” film बनी और 1976 में “राखी और राइफल” और “रक्षा बंधन” नामक film बनी।
  • जब सिकंदर और पुरूवास के बीच युद्ध होने वाला था तब सिकंदर की पत्नी ने पुरूवास को Rakhi बाधी थी और बदले में सिकंदर को न मारने का वचन लिया था। युद्ध के दौरान पुरूवास ने Rakhi और दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए, सिकंदर को Jivan दान दिया था।
  • श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने “बंग-भंग” का विरोध करते समय “रक्षा-बंधन” त्यौहार को Bangal निवासियों के भाईचारे और एकता का प्रतीक बना कर इसका राजनीतिक उपयोग किया था।

भारत में रक्षा बंधन पर कई साहित्यिक ग्रन्थ भी लिखे गये हैं जिनमे “हरिकृष्ण प्रेमी” का ऐतिहासिक नाटक “रक्षाबंधन” जिसका 1991 में 18 वां संस्करण Published हो चुका हैं।


 

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