Happiness 15+ Dose

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Happiness 😘 एक ऐसी स्थिति है जो आपको उस एक खास पल में अंदर से प्रसन्न बना देती है। कई बार यह खास पल हमारे डेली रुटीन में ही छिपा होता है, बस इसके लिए जरूरी होता है आपके अंदर परिस्थिति की समझ होना। सुख चाहे देने का हो, दोस्त से मिलने का या फिर अकेले में शीशा देखकर मुस्कुराने का, यह खुद को खुशी से सराबोर कर देने का अवसर है। जानिए कुछ तरीके-

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पहचानिए अपनी #Happiness

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तनाव के बीच ‘खुशी की डोज’

भले ही काम का तनाव हो या भागदौड़ हो जीवन की, Happiness एक ऐसी ‘डोज’ का काम करती है, जो खुशी-खुशी काम करने की भावना का संचार करती है। इससे अपने अंदर गुणों और मानवीय भावनाओं की भी वृद्धि होती है। व्यवहार विशेषज्ञों के अनुसार, Happiness यानी प्रसन्नता ही वह माध्यम है, जिसके जरिए आप एक बेहतर जीवन की कल्पना कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव लाने होंगे, जैसे कि आप जिस स्थिति में हैं, उसे अपने लिए बेस्ट मानना व संतुष्ट रहना।

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इस तरह समझें

बारिश के बाद की धूप कई बार परेशान करती है, लेकिन इस बीच स्कूल से लौटे बच्चों का चेहरा देखकर मिलने वाली खुशी का अहसास एक मां ही कर सकती है। खास बात यह कि उस मां को उस समय न तो वह धूप चुभती है और न ही जीवन की भागदौड़ में चल रही समस्या का ध्यान ही रह पाता है।

बदलता ट्रेंड

अब जबकि कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आ चुकी है और व्यावहारिक तौर पर भी स्पष्ट है कि एक स्मार्टफोन यूजर दिन के औसतन पांच से छह घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहा है तो उसके लिए Happiness के मायने भी बदल गए हैं। वास्तव में, देखा जाए तो बात चाहे एक सेल्फी लेने की हो या अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर आए लाइक्स को देखने की, प्रसन्नता या आत्म-संतुष्टि के लिए अब ट्रेंड बदल गया है। हालांकि ऐसा नहीं है कि अब सहायता करने, परोपकार की भावना, करुणा जैसे दूसरे तरीके निष्प्रभावी हो गए हों, बल्कि इसमें सोशल मीडिया और वर्चुअल वर्ल्ड भी शामिल हो गया है।

अलग से नहीं जरूरत

लोगों में यह भ्रम होता है कि उन्हें Happiness के लिए अलग से समय निकालना होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। आप चाहे जो काम करें, इस बीच कुछ समय निकालकर खुद के लिए तय करना ही स्व-प्रसन्नता है। इससे आपके जीवन की गुणवत्ता तो बेहतर होगी ही, साथ ही आपकी काम करने की क्षमता में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा Happiness जीवन के बहुत-से घटकों में आपको बेहतर अनुभव की ओर प्रेरित करती है।

देने का सुख’ अव्वल

इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘देने का सुख’ या परोपकार की भावना हमेशा से ही सुकून, आत्म-संतुष्टि, प्रसन्नता देने में अव्वल है। दरअसल, मानवीयता की बात की जाए तो करुणा ही वह गुण है जो हमें अन्य जीवों से खास और महत्त्वपूर्ण बनाता है। ऐसे में अंगदान, रक्तदान जैसे परोपकारी कार्यों के साथ ही लोग अब अनाथ आश्रमों, वृद्धाश्रमों में अपना जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ जैसे खास दिवस पर उत्सव मना रहे हैं। स्पष्ट है कि प्रसन्नता को कहीं खोजने की जरूरत नहीं है। यह हमारे मन में ही है। दूसरों की मदद करने से जो खुशी मिलती है, उसको व्यक्त करना मुश्किल है।

कुछ प्रभावी तरीके

Happiness को जीवन में शामिल करने के लिए कुछ प्रभावी तरीके अपनाए जा सकते हैं-

भागदौड़ भरे जीवन में एक सेल्फी भी खुशी की वजह बन सकती है।

आय के स्रोत बढ़ाने की जद्दोजहद के बीच अपने पसंदीदा गीत सुनते रहें।

लोन चुकाने की आपाधापी में खुद पर कोई वीडियो फिल्माना या खुद के साथ किसी हीरो की तरह डील करना न भूलें।

सोशल प्रोफाइल पर की गई पोस्ट पर कितने लाइक्स आए, काम के बीच में देख सकते हैं।

बच्चों की स्कूल फीस का जुगाड़ करते समय उनकी स्कूल एक्टिविटी के लिए घर पर उनके साथ पार्टिसिपेट करना न छोड़ें।

सुबह की सैर पर निकलते हुए चिड़ियों की चहचहाहट सुनें और उनको दाना खिलाएं।

पढ़ाई के माहौल के बीच बच्चों को भी ब्रेक दिलवाएं। उन्हें फिल्म भी दिखा सकते हैं।

Happiness को किसी दायरे में न बांधें, बल्कि खुद को इसके लिए तैयार करें।


 

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